जब मियां-बीवी राजी तो...

हथौड़ा हर समाज में होते हैं कुछ लोग जिन्हें कोई काम नहीं होता। वे अपने नाकाम होने के बहाने अपने 'काम की सार्थकता' यहां-वहां खोजते फिरते रहते हैं। कभी कोई मुद्दा पकड़ लेते हैं तो कभी कोई। मुफ्त में हाथ आए मुद्दे को आसानी से नहीं छोड़ते। ठीक हमारे नेताओं की तरह।... [पूरी पोस्ट]
writer अंशुमाली रस्तोगी

व्यंग्य

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[07 Apr 2010 01:42 AM]

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