भर्तृहरि नीति शतक-जागरुक लोग अपनी बेइज्जती नहीं सहते

दीपक भारतदीप की हिंदी एक्सप्रेस पत्रिका सवल्पस्नायुवशेषमलिनं निर्मासमप्यस्थिगोः श्वा लब्ध्वा परितोषमेति न तु तत्तस्य क्षुधाशान्तये।सिंहो जम्बुकंकमागतमपि त्यकत्वा निहन्ति द्विपं सर्वः कृच्छ्रगतोऽप वांछति जनः सत्तवानुरूपं फलम्।।हिन्दी में भावार्थ-जिस तरह कुत्ता थोड़े रस और चरबी वाली हड्डी पाकर... [पूरी पोस्ट]
writer दीपक भारतदीप

समाज

views
8
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
0
[06 Apr 2010 23:48 PM]

Free Vedic Astrology From Astrobix