आपकी पवित्र आस्थाओं का मजाक कौन उड़ा रहा है ? - सतीश सक्सेना

लाइट ले यार ! "आखि़र इस क़हतुर्रिजाल अर्थात इनसानों के अभाव के दौर में , मुसलमानों से नफ़रत करने को ज़माने का दस्तूर बन जाने के दौर में कोई एक आदमी तो है जिसे नफ़रत ने अभी तक अन्धा नहीं बनाया है , जिसके दिल में मुहब्बत और हमदर्दी है , जिसका ज़मीर ज़िन्दा है । जो अमन... [पूरी पोस्ट]
writer सतीश सक्सेना
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[06 Apr 2010 22:56 PM]

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