योगनीति से अब राजनीति
विकास पाण्डेय राजनीति की अब ऐसी कोई परिभाषा बची नहीं है,जिसकी बात की जाए.सियासत बाजो ने इसका हर पहलुओं पर चीर हरण किया है.कोई कहता है जीवन के इस अमूल्य समय को दो कौड़ी के राजनीति पर क्यों खराब किया जाए, तो किसी का कथन है कि यह किसका किया धरा है,जब साक्षर...
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देवेश प्रताप
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[06 Apr 2010 21:55 PM]



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