जांके नख अरु जटा विशाला,सोई तापस प्रसिद्द कलिकाला
हिन्दू मन अभी भी उस मानसिकता से नहीं निकल पाया है जब मध्यकाल में उसके देश,धर्म,संस्कृति, सभी को तहस-नहस किया जा रहा था,तत्कालीन समाज इसका प्रतिकार नहीं कर पाया,और अपने को असहाय समझ निराशा के गर्त में डूब रहा था. तब संतो ने भक्ति में नाच -गान...
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Amit Sharma
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[20 Mar 2010 03:54 AM]



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