कल रात नींद न आई
कल रात नींद न आई करवट बदल बदल कर कोशिश की थी सोने कीआखें खुद बा खुद भर आईतुम्हारे न आने परमैं उदास होता हूँ जबभीऐसा ही होता है मेरे साथफिर जलाई भी मैंने माचिस औरबंद डायरी से निकली थी तुम्हारी तस्वीर कुछ ही देर में बुझ गयी थी रौशनीऔर उसमे खो गयी...
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neeshoo
कविता
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[06 Apr 2010 14:46 PM]



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