खुदा कसम.... बहुत ही सस्ता
मच्छरों ने हाय ये क्या कांड कर डाला,अच्छे भले आदमी को भांड कर डाला....दफ्तर की उलझने क्या पहले ही कुछ कम थीं,गृहस्थी के बोझ ने तो हमें सांड कर डाला....देखा जो हमने दोस्तों को तितलियों के साथ,अपने भी दिल ने फौरन डिमांड कर डाला.......किस्मत थी लेकिन फूटी,...
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श्रेयार्चन
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[06 Apr 2010 14:17 PM]



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