जीवनपथ
जीवनपथ पर बस चलता ही रहा, जो पथ दिखा मुड़ता ही रहा,कभी सोचा ही नही की कौन हूँ में, क्या अस्तित्व है मेरा,की में भी तो उसी भीड़ का हिस्सा हूँ, जिसे में भीड़ कहता हूँ,की मेरे भी तो वही कर्तव्य हैं जिनको में भीड़ में धुन्दता हूँ,पर क्या में वो हूँ जो में...
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हिमांशु पन्त
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[29 Mar 2010 12:01 PM]



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