कुछ उम्मीदें
उस दिन को कोसूं या खुद को दोष दूं,सोचा ही नहीं था की कुछ गलत सोच लिया था,पता नहीं क्या था पर इश्क तो तुझसे कर ही लिया था....सपनों पे यकीं तो था पर इस कदर करना था की नहीं,इस पर तो शायद कभी गौर ही नहीं कर पाए हम,पता नहीं क्या था पर हर सपना तो तुझको दे ही...
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हिमांशु पन्त
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[29 Mar 2010 14:29 PM]



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