खडंजा..

Voice Of Heart : पुकार - अंतर्मन की क्या आपको याद हैं वो दिन जब ये चमकती डामर की सड़कों के बदले वो उबड़ खाबड़ खडंजे हुआ करते थे... जिंदगी कुछ अलग सी हुआ करती थी... तो यहाँ पे मैंने कुछ पुरानी जिंदगी को खडंजे से जोड़ते हुए नयी जिंदगी से तुलना करने का एक छोटा सा प्रयास किया है...ईंट पत्थर से... [पूरी पोस्ट]
writer हिमांशु पन्त
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[01 Apr 2010 03:34 AM]

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