हत्यारों को पहचान पाना अब बड़ा मुश्किल है.
छत्तीसगढ़ के बस्तर में नक्सलियों की हिंसा के कारण ७८ से ज़्यादा लोगों की जानें चली गयी. बेशक नक्सली अपनी सफलता का जश्न मना रहे होंगे. लेकिन मानवता खून के आँसू रो रही है. लोग सवाल कर रहे है कि यह कैसा नक्सलवाद है..? यह कैसी विचारधारा है..? ये कैसा माओवाद है...
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गिरीश पंकज
सवक्तव्य- कविता
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[06 Apr 2010 13:58 PM]



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