कूकते कूकते चुप क्यों हो जाती है कोयल

कवि कोकास                  ग्रीष्मागमन हो रहा है । किसी दिन नींद से जल्दी जागिये और सुबह सुबह कहीं खेतों की ओर निकल जाइये , ठंडी ठंडी हवा , नींद  से जागा हुआ रास्ता , टहलने निकले... [पूरी पोस्ट]
writer शरद कोकास

कविता

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[06 Apr 2010 13:32 PM]

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