बस इतना सा ख्वाब है .....पूरे हो जाएं तो कयामत होगी ..झा जी कहिन ..

kuch bhi kabhi bhi कल तो आपने देखा ही था कि कौन मूड में था , एकदम से कंप्यूटर को पजिया के सो गया , बीच झपकी में ही उठ उठ कर टीपते रहे , पढते रहे ..ओह नहीं नहीं ..पढते रहे ..फ़िर टीपते रहे .............मगर फ़िर ।ज्यादा की इच्छा नहीं है , कभी रही भी नहीं । और होती भी तो कौन... [पूरी पोस्ट]
writer अजय कुमार झा
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[06 Apr 2010 13:26 PM]

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