बस्‍तर के चिंतलनार में शहीद जवानों के लिए .....

आरंभ अफ़शोस कि तू मर गयागुजरे दिनों की समाचार की तरहदुख है कि तुझे जांबाजी से लड़ते हुए वे देख नहीं पायेवो देखना भी नहीं चाहते थेक्‍योंकि वे नहीं जानते जांबाजी किसे कहते हैंजंगल वार कालेज की हुनर कोई काम ना आईज्ञान जो काम ना आये वो किस काम कामगर दुश्‍मन... [पूरी पोस्ट]
writer संजीव तिवारी .. Sanjeeva Tiwari

चिंतलनार

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[06 Apr 2010 07:48 AM]

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