असली चेहरा तो हमने सात तालों में बन्द कर रखा है
हमारे घर के प्रोडक्ट बनाते-बनाते आखिरकार भगवान थक गया तो अन्तिम बार थोड़ा टांच-वांच कर हमें छोटा-मोटा रूप दे दाकर धरती पर भेज दिया। अब माँ भी परेशान हो चली थी, बच्चों की परवरिश करते-करते, तो उसने भी भगवान द्वारा छोड़ी गयी छोटी-मोटी दरजों को दूर करने में...
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ajit gupta
समाजिक सरोकार
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[06 Apr 2010 07:17 AM]



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