फिर भी पायें डबल तरक्की बल्ले-बल्ले
बने विधायक मगन हो भर मन में उत्साहलेकिन अब होने लगा उनको कष्ट अथाहउनको कष्ट अथाह चाह 'सेवा' की भागीजन-सेवक जी बने महज 'मेवा' अनुरागीदिव्यदृष्टि पब्लिक की काटें जेब निठल्लेफिर भी पायें डबल तरक्की बल्ले-बल्ले...
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दिव्यदृष्टि
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[06 Apr 2010 05:07 AM]



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