मैं और तन्हाई - भाग २
मैं और तन्हाई - भाग १ काला अंधियारा सन्नाटाइक आहट नें उसको काटान जाने कहां से आई थीइक धुंधली सी परछाई थीबोली मैं साथ निभाऊंगीतुम्हें छोड कभी न जाऊंगीमैं चिल्लाई और झल्लाईपर ढीठ थी कितनी परछाईमैं रोती रही वो हंसती रहीहंस-हंस कर मुझको डसती रहीछलनी कर गई...
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सीमा सचदेव
कविता
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[06 Apr 2010 03:36 AM]



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