उनको देखा, दिल मचलकर रह गया
उनको देखा, दिल मचलकर रह गया चोट खाई, बन के पत्थर रह गयामिट गये कितने ही ज़ख्मों के निशाँज़ख्म दिल का बनकर नश्तर रह गयाक्या मिला है मुझको आँखें खोलकर ?हर नज़ारा ख्वाब बनकर रह गयाचार आँसू क्या बहाए हुस्ननेहौसला-ए-संग ढहकर रह गयाऐ ग़मों, अब अश्क़ ना माँगा...
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मिलिंद / Milind
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[06 Apr 2010 03:04 AM]



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