खिलाड़ी
.......अधूरी जिन्दगी अभी तक जी रहा था मैं ....एक दिन ...माँ मुझे उठाने आयी ,सुबह के नौ बज रहे थे । गुस्से में माँ बोल रही थी , क्या होगा तेरा ?आंटी जी लडकाहै ना .....वीरू ....मालूम है ना ,तेरे साथ पढ़ता था ना .....? मैं कुछ बोला नहीं ....माँका ....रोजाना...
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भंगार
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[06 Apr 2010 02:53 AM]



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