बातों का बाजार

प्रेम का दरिया बात करनी मुझे मुश्किल कभी ऐसी तो ना थीजैसी अब है तेरी महफिल कभी ऐसी तो ना थी।अहमद फराज के इस मशहूर शेर के पहले मिसरे में ‘मुश्किल’ की जगह ‘आसान’ कर लीजिए, क्योंकि हिंदुस्तान के टेलीकाम बाजार में काल रेट का युद्ध अब बेहद रोमांचक होता जा रहा है। वीडियोकान... [पूरी पोस्ट]
writer प्रेमचंद गांधी Prem Chand Gandhi

बाजार

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[06 Apr 2010 01:04 AM]

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