कितना चूसोगे अपनी ही मां को?दूध खतम हो चुका और अब तो खून भी खतम हो रहा है!

अमीर धरती गरीब लोग कितना चूसोगे अपनी ही मां को?उस मां को जो हमारे खाने पीने का आदिकाल से खयाल रखती आ रही है।उस मां की हालत हम लोगों ने अपने लालच से बदतर कर दी है।अब वो बेज़ार हो चुकी है।सड़क पर पड़े कमज़ोर जानवर की तरह जिसके जिस्म मे खुद के लिये कुछ नही और उसके शरीर से लिपटे... [पूरी पोस्ट]
writer Anil Pusadkar
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[06 Apr 2010 01:14 AM]

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