समय और समझ...!
समय हैलोग हैंचीजें हैंनहीं है तोसमय कीलोगों कीचीजों की समझहवा हैपृथ्वी हैजल हैनहीं है तोहवा कोपृथ्वी कोजल कोसहेज कर रखने कीसमझसमय रहते जरूरी हैसबकी परखऔर सहेजकर रखने की जिद.....!===========================हृदयेश मयंक की रचना साभार प्रस्तुत....
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Dr. Chandra Kumar Jain
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[05 Apr 2010 22:37 PM]



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