चाँद और लहर

Unmanaa जब लहर ने उठा शीश ऊपर लखा चाँद ने मुस्कुरा कर निगाह फेर ली ! ऊब कर शून्यता से गगन की बहुतएक दिन चाँदनी आ सरित से मिली ,हर लहर में निरख ज्योति के पुंज कोएक प्रतिबिम्ब पाकर बहुत वह खिली !वीचि के गान में भूल अपनत्व को उन तरंगों में जा कर स्वयं खो गयी ,ताल... [पूरी पोस्ट]
writer Sadhana Vaid
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[05 Apr 2010 21:42 PM]

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