मैंने मोहब्बत की है

उधेड़-बुन मैंने मोहब्बत की है और अनेकों से की हैजिसकी सज़ा मुझे बरोबर मिली हैकहता था मैं महबूब जिनकोपाता हूँ आज मैं दूर उनकोऐसा नहीं कि मोहब्बत में कमी थीबस फ़क़त एक की वो जागीर नहीं थीदुनिया को मोहब्बत से भली रंजिश लगी हैइसीलिए तो हो एक से ऐसी बंदिश नहीं हैझूठ कहती... [पूरी पोस्ट]
writer Rahul Upadhyaya

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[05 Apr 2010 17:46 PM]

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