मुर्दे की आवाज़
एक पूरी तरह सुनसान सड़क थी यह। दूर-दूर तक फैले जंगल अमावस्या की रात को और भयावह बना रहे थे। यह दृश्य किसी भी अकेले व्यक्ति का रक्त जमा देने के लिये पर्याप्त था। लेकिन यह व्यक्ति शायद कुछ ज्यादा ही निडर था। काली जैकेट और इसी रंग की पैंट में वह बहुत आराम से...
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कल्किआन संवादाता
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[05 Apr 2010 14:30 PM]



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