कितना कठिन और लम्बा है 'प्रेम' जैसे एक छोटे से शब्द का उच्चारण
कई दिन हुए कुछ लिखना हो न सका। नियमित लिखा जाय यह जरूरी तो नहीं। और सिर्फ लिखने के लिए लिखना....! आज अभी कुछ देर पहले ही कुछ यूँ - सा बन गया। अगर यह कविता है तो आज आपके साथा साझा करते हैं चार कवितायें। इनके वास्ते शीर्षक भी कुछ सूझ नहीं रहा है। फिर वही...
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sidheshwer
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[05 Apr 2010 14:06 PM]



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