अलविदा

Meri Kavitayein चंद कतरे ही हैं आंसुओं के ,लेकिन आज मेरी आँख नम है,सपने तो आज भी मेरे ही हैं,पर उनमें दोस्तों का प्यार कम है.जाने को तो सब जाते हैं,पर इन रिश्तों की बात अलग है ,साथ रहते हैं तो हँसते हंसाते,जाने के बाद रुलाते बहुत हैं चलते- चलते जैसे जेठ कि दुपहरी में,... [पूरी पोस्ट]
writer Navnit Nirav
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[05 Apr 2010 13:25 PM]

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