फिर सावन रुत की पवन चली

प्रत्येक वाणी में महाकाव्य... आज हम एक और कलाकार का आगाज़ यहाँ करना चाहते हैं जोकि कम मशहूर हैं मगर उनकी चंद गज़लें हम दो दोस्तों को बेहद पसंद आयीं थीं और हमनें उनकी कैसेट मिलकर लम्बे अरसे तक तलाश की थीं। दरअसल मुन्नी बेगम मेरे दोस्त ने पहली बार मुझे सुनाई और खुद सुनी थी और एक दिन वह... [पूरी पोस्ट]
writer महेन

मुन्नी बेगम

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[05 Apr 2010 12:13 PM]

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