जयति जय पब्लिसिटी माता
जयति जय पब्लिसिटी माताअपनी बैंक खुला दो मैया, मेरा भी खाताऐरे गैरे तुम्हें पा गयेफ़र्श छोड़ अर्श पै छा गयेबन्धु बान्धवी सब भुला गएतोड़ दिया नाताजयति जय पब्लिसिटी माताकाम न जो बनता प्रयास सेअसफलता जाती न पास सेकिन्तु तुम्हारी एक साँस सेगूँगा भी गाताजयति जय...
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विवेक सिंह
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[05 Apr 2010 12:41 PM]



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