पत्रकारिता के 40 साल पूरे कर चुके वरिष्ठ पत्रकार सुरेंद्र किशोर से ‘ ‘प्रभात खबर ’ की बातचीत
कोई सरकारी परसादी लेनी होती तो नीतीश कुमार का शासन आने की प्रतीक्षा क्यों करता ?अपना यही है सहन/आंगन/,यही सायबान/छप्पर/है,फैली हुई जमीन,खुला आसमान है,---- मख्मूर सईदीमैं पूरी ताकत के साथ शब्दों को फेंकता हूं आदमी की तरफ यह जानते हुए कि आदमी का कुछ नहीं...
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Surendra Kishore
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[05 Apr 2010 11:42 AM]



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