मेरे मन को भाई : सलोनी राजपूत का पहला शिशुगीत
मेरे मन को भाई!रंग-बिरंगे पंखोंवालीतितली उड़कर आई!मेरे मन को भाई!देखा सुंदर फूल जहाँ पर,अपनी सूँड़ उठाई!चूसा उसका रस मीठा फिर,धीरे से मुस्काई!मेरे मन को भाई!मैंने सोचा पकड़ूँ इसको,मगर हाथ ना आई!इधर उड़ी फिर उधर उड़ी वह,उसने रेस लगाई!मेरे मन को भाई! सलोनी...
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रावेंद्रकुमार रवि
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[05 Apr 2010 09:32 AM]



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