चलो धूप से बात करें ` ` `
कुछ कारणो से लम्बे समय से ब्लागजगत से दूर रही. आज एक रचना के साथ लौट रही हूँ. चलो धूप से बात करें अब तो शुभ प्रभात करें . रिश्ता-रिश्ता स्पर्श करें अब तो ना आघात करें . सुनियोजित करते ही हैं कुछ तो अकस्मात करें . तेरे-मेरे अपने है-सपने फिर किसका रक्तपात...
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Razia
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[05 Apr 2010 09:03 AM]



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