वो भी जलता है तडपती है प्यास मेरी तरह
फिजां भी लगती है तन्हा उदास मेरी तरह क्या इसे भी है किसी की तलाश मेरी तरह चाँद सहरा की वादियों में भटका शब् भर वो भी जलता है तडपती है प्यास मेरी तरह खुद को रखा है सब्ज आंसुओ की बारिश से यूँ तो आता है हिज्र किसे रास मेरी तरह रोज आती है सरे शाम हिचकियाँ...
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[05 Apr 2010 08:10 AM]



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