आज एक बार फ़िर सूरज को उगता देखो
आज एक बार फ़िर सूरज को उगता देखो |और चाँद को चान्दनी रात मे जागता देखो |क्या पता कल ये धरती चाँद और सूरज हो ना हो आज एक बार सबसे मुस्करा के बात करो बिताये हुये पलों को साथ साथ याद करो क्या पता कल चेहरे को मुस्कुराना और दिमाग को पुराने...
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संजय भास्कर
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[05 Apr 2010 07:12 AM]



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