आज की शब -परवीन शाकिर
परवीन शाकिर की बहुत सी ख़ूबसूरत नज़्मों में से ये वाली बीते मार्च कई दफ़ा गुनगुनाई . मन हुआ नज़्म के साथ अपनी कच्ची-पक्की गुनगुनाहट भी सहेज लूँ यहाँ .धुन बहुत सुनी सुनाई सी है.आज की शब तो किसी तौर गुज़र जाएगी रात गहरी है मगर चाँद चमकता है अभीमेरे माथे पे...
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पारूल
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[05 Apr 2010 05:55 AM]



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