एक झटके में ठुकराया मंत्री पद
1997 में मुंबई से प्रकाशित 'निर्मोही नानाजी' पुस्तिका में स्वर्गीय रज्जू भईया लिखते हैं, 'संगठन के कार्य के लिये अच्छे लोग बाहर रहने चाहिए। इसलिये मेरी नानाजी से केन्द्र में मंत्री न बनने की बात हुई। प्रात: काल छह बजे के समाचारों में जब मैंने सुना कि...
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bhaarat kumar
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[05 Apr 2010 05:30 AM]



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