कहीं यह पलायन तो नहीं...!
प्रत्याशित सफलता का न होनानीयति पर ठीकरा कसना क्यों हो...? कहीं यह पलायन तो नहीं...!इसकी समीक्षाठंडे बस्ते में डाल देती हैगर्म लोहे के ताप कोअसफलता से प्राप्तआग की ज्वालायदि सच्ची हैफिरतपा कर स्वयं कोकुन्दन न बना देगी....!...
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हेमन्त कुमार
कविता
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[05 Apr 2010 04:09 AM]



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