अपनी मंज़िल कहीं और तलाशिये
बन रही है यह ज़िंदगी एक रास्ता भूलभुलैया सीवो कहते हैं अब अपनी मंज़िल कहीं और तलाशियेखत्म होने को है अब सब बातें प्यार कीअब कोई नया दर्द और नया शग़ल तलाशियेनाकाम है सब हसरतें इस पत्थर दिल संसार मेंजाइए अब नया शहर ,कोई नया युग तलाशियेदिखता नही नज़रों में...
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रंजना [रंजू भाटिया]
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[05 Apr 2010 03:42 AM]



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