कोई अधिकार नहीं..... कोई उलाहना नहीं

मेरे आस-पास तुम्हें अगर मेरी जरूरत होती तो तुम मुझे इन राहों पर अकेली न छोड़ते । एक लंबे काल तक मैं अपने आप से ही बातें करती रही। कभी तुम्हारे भीतर जा कर सवाल करती तो कभी अपने अंदर से जवाब तलाषती। पर मेरी तुम्हारी चुप सी बातें मेरे अंदर जवान होती और कुछ समय बाद वहीं... [पूरी पोस्ट]
writer MANVINDER BHIMBER

मनविंदर भिम्बर

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[05 Apr 2010 02:40 AM]

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