नागरी लिपि या रोमन हिंदी
उमेश चतुर्वेदी1957 में लखनऊ से प्रकाशित युगचेतना पत्रिका में रघुवीर सहाय की हिंदी पर एक कविता छपी थी, जिसमें उन्होंने हिंदी को दुहाजू की नई बीवी बताया था। राजनीतिक सत्तातंत्र के हाथों हिंदी की जो कथित सेवा हो रही थी, इस कविता के जरिए रघुवीर सहाय ने उसकी...
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उमेश चतुर्वेदी
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[05 Apr 2010 01:46 AM]



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