पागल दिल

क्या करूँ मुझे लिखना नहीं आता... अपने दिल के पागलपन को,किसे बताऊँ, किस-किस से छुपाऊँ,इस भोलेपन के मारे को,क्या-क्या कहूँ? कैसे समझाऊँ?बस यूँ हि ये किसी के आगे,रो पड़ता है, हँस देता है,एक दो मीठे बोल मिलें तो,उसी को अपना कह देता है,नहीं समझता बात ये इतनी,दिल का हँसना, दिल का रोना ठीक... [पूरी पोस्ट]
writer Gurnam Singh Sodhi
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[05 Apr 2010 01:39 AM]

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