किताबों की दुनिया: 27
अगर तुझको फुर्सत नहीं तो ना आ मगर एक अच्छा नबी भेज देक़यामत के दिन खो ना जाएँ कहीं ये अच्छी घडी है, अभी भेज दे. जिस शायर ने जब ये शेर कहा उसके सत्रह साल बाद अचानक इस शेर को अल्लाह के खिलाफ लिखा माना गया और उस शायर के खिलाफ फ़तवा जारी करते हुए उसे काफ़िर...
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नीरज गोस्वामी
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[05 Apr 2010 00:35 AM]



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