तारीफ़ ए ग़ज़ल

वीर की कलम से लफ़्ज़ों के नक़ाब से गम छुपा लिया करते हैं, तारीफ़ ए ग़ज़ल पर हम मुस्कुरा लिया करते हैं| जब ख़ामोशी खटखटाती है तन्हाई का दरवाज़ा, अपनी ग़ज़लों को हम गुनगुना लिया करते हैं| तारीफ़ ए ग़ज़ल पर हम मुस्कुरा लिया करते हैं… कभी दिल मचल के कहने लगता है हाल... [पूरी पोस्ट]
writer वीर

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[04 Apr 2010 23:48 PM]

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