वो
इन दिनों बड़ी उलझन में रहता हैं जिदंगी की जालों को हटाता हैं वो।बच्चों की मुस्कराहट पर जान छिड़कता हैंचाँद न माँग ले ये, आँखे मिलाने से बचता हैं वो।खुशियों की तलाश में दिन-भर घूमता फिरता हैंखुशियों का एक अक्स भी ढूढ़ नही पाता हैं वो।पाँच प्राणियों की पेट...
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सुशील कुमार छौक्कर
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[04 Apr 2010 23:33 PM]



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