रोटियां कपड़े मुहब्बत, घर सलामत चाहिए

naturica बुलबुलें हम हैं गुलिश्तां है हमारा पर हमें ।अपने ही माहौल में अब हिफाज़त चाहिए॥कुछ नए रंग की ये ग़ज़ल है , पेश कर रहा हूँ ....रोटियां कपड़े मुहब्बत घर सलामत चाहिए।ज़िन्दगी यानी हमें भी पुर शिक़ायत चाहिए ॥दिले खाना ख़राब को यार जम्हूरियत न दे ।इस पे... [पूरी पोस्ट]
writer Deepak Tiruwa

ग़ज़ल

views
13
upvote
1
downvote
0
rating
1
comments
3
[04 Apr 2010 22:52 PM]

Free Vedic Astrology From Astrobix