जुगलबंदी - दर्पण और अर्श की

पाल ले इक रोग नादां जिंदगी के वास्ते... कुछ अनूठे और आधुनिक बिम्बों का अपनी कविता, त्रिवेणी, क्षणिका और इन दिनों अपनी कहानी में भी इस्तेमाल कर, दर्पण ने कम समय में ही अपना एक बहुत ही खास स्थान बना लिया है हिंदी ब्लौग-जगत में। वहीं दूसरी तरफ अपने इश्किया शेरों और नाज़ुक ग़ज़लों को लेकर अर्श की... [पूरी पोस्ट]
writer गौतम राजरिशी

बहरे मुतदारिक

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[04 Apr 2010 21:30 PM]

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