होनहार के खेल - 5
भाग-1, 2, 3, 4 का शेष .............उस दिन के बाद निश्चिन्त होकर ढाई सौ वर्ष तक मैंने खूब भोग भोगे | अवर्णीनीय एश्वर्य का उपभोग किया | रंगीन और हसीन महफ़िलों में डूब गया , पर मुझे क्या मालूम था , कि भोग और एश्वर्य के उन मादक प्यालों में होनहार ने ऐसा जहर...
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क्षत्रिय
स्व.श्री तन सिंह जी कलम से
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[04 Apr 2010 21:39 PM]



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