...केरल में हुआ इक महामिलन ......(केरल यात्रा संस्मरण -८)
आज की दुनियां की भाग दौड़ ,आपाधापी में लोगों को खुद अपने लिए ही फुरसत नहीं है तब दूसरों के लिये समय की जुगाड़ करना कितना मुश्किल तलब( मुआमला )होता है इसका मुझे पूरा अहसास है और इसलिए ही दूसरों के वक्त की सीमाओं / पाबंदियों का मुझे ख़याल रहता...
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Arvind Mishra
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[04 Apr 2010 13:45 PM]



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