ऐसा कोई हंसी दिलदार मांगता हूँ.......

साहित्य योग निंद्रा नहीं स्वप्न मांगता हूँ कभी ना बीते वो रात मांगता हूँ आकर जो पोंछ जाये मेरी आँखों से आंसू, ऐसा कोई हंसी दिलदार मांगता हूँ....... लिख गाया अपनी मुस्कुराहट से इस दिल के शीशे-दिल पर अपना नाम कि टुटा तो भी मुस्कुराया  हर... [पूरी पोस्ट]
writer Tej Pratap Singh
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[04 Apr 2010 12:31 PM]

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