दर्दों का एक जखीरा सैलाब बन गया !
(हर इंसान के दिल में कुछ न कुछ अनुभूतियाँ होती हैं और वह उसे किसी न किसी रूप में व्यक्त करने की कोशिश करता है ......लीजिये एक ईमानदार कोशिश ,आपके सामने प्रस्तुत है ) - उमेश पाठकदर्दों का एक जखीरा सैलाब बन गया !जी लेंगे,खुश रहेंगे बस खाब बन गया!दुशवारियां...
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Umesh Pathak / उमेश पाठक
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[04 Apr 2010 10:07 AM]



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